फर्जी कॉल अधिकतर 0092 से शुरू होने वाले नंबर्स से आते हैं। स्कैमर कभी-कभी खुद को केबीसी टीम का बताकर फोन करते हैं और पीड़ितों से आसान सा सवाल पूछते हैं। वे यह भी कहते हैं कि पीड़ित का मोबाइल नंबर लकी ड्रॉ में चुना गया है

दर्शक कैश प्राइज जीतने के लिए सोनी-Liv मोबाइल ऐप पर केबीसी प्ले-अलॉन्ग फीचर के माध्यम से भी शो में भाग ले सकते हैं। स्कैमर यही विश्वास दिलाकर लोगों को धोखा दे रहे हैं कि उन्होंने वास्तव में केबीसी ऑनलाइन में बड़ा इनाम जीता है। इस बाबत दिल्ली पुलिस ने पूछने पर बताया कि केबीसी घोटाला कुछ नया नहीं है और यह हर साल होता है जब शो प्रसारित किया जा रहा होता है। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि लोग अभी भी इस आसान घोटाले की चपेट में आ रहे हैं क्योंकि कुछ लोग “अपनी किस्मत पर अंधविश्वास करते हैं”।
पुलिस शिकायतों के अनुसार फर्जी कॉल अधिकतर 0092 से शुरू होने वाले नंबर्स से आते हैं। स्कैमर कभी-कभी खुद को केबीसी टीम का बताकर फोन करते हैं और पीड़ितों से आसान सा सवाल पूछते हैं। वे यह भी कहते हैं कि पीड़ित का मोबाइल नंबर लकी ड्रॉ में चुना गया है।
स्कैमर अपने डेटाबेस से किसी को भी रैंडम कॉल करते हैं और फंसाने की कोशिश करते हैं। अगर वॉयस कॉल से लोग झांसे में नहीं आते तो स्कैमर व्हाट्सएप के माध्यम से भी लोगों तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। स्कैमर अधिकांश पीड़ितों को यह कहकर मनाते हैं कि “आपके परिवार के किसी सदस्य ने भाग लिया होगा और आपका नंबर दिया होगा”. दिलचस्प बात यह है कि लोग उनका विश्वास करते हैं।
